समस्टियों की पारस्परिक क्रियाएँ जाति अ जाति ब पारस्परिक क्रिया का नाम + + सहोपकारिता - - स्पर्धा + - परभक्षण + - परजीविता + 0 सहभोजिता - 0 अंतरजातीय परजीविता ऐसे किसी भी आवास की कल्पना नहीं की जा सकती जहाँ केवल एक ही जाति का वास हो , क्योंकि ऐसा कोई आवास है ही नहीं और इसलिए ऐसी पारिस्थितिकी अकल्पित है। किसी भी जाति के लिए न्यूनतम आवश्यकता एक और जाति की है जिसको वह भोजन के रूप में ले सके। पादप जाति भी जो अपना आहार स्वयं बनाती है , अकेली जीवित नहीं रह सकती ; इसे मृदा के कार्बनिक पदार्थ को तोडने और अकार्बनिक पोषकों को इसके अवशोषण के लिए लौटने के लिए मृदा के सूक्ष्मजीवों की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा बिना प्राणी एजेंट के पादप परागण की व्यवस्था कैसे करेगा ? यह स्पष्ट है कि प्रकृति में प्राणी , पादप और सूक्ष्मजीव न तो पृथक रह सकते हैं और न ही रहते हैं , बल्कि जैव समुदाय बनाने ...